Apna Apna Rasta Hai Kuch Nahi/ अपना अपना रास्ता है कुछ नहीं
अपना अपना रास्ता है कुछ नहीं
क्या भला है क्या बुरा है कुछ नहीं
जुस्तजू है इक मुसलसल जुस्तजू
क्या कहीं कुछ खो गया है कुछ नहीं
(जुस्तजू = तलाश, खोज), (मुसलसल = लगातार)
मोहर मेरे नाम की हर शै पे है
मेरे घर में मेरा क्या है कुछ नहीं
(शै = वस्तु, पदार्थ, चीज़)
कहने वाले अपनी अपनी कह गये
मुझ से पूछो कुछ सुना है कुछ नहीं
कोई दरवाज़े पे है तो क्या हुआ
आप से कुछ माँगता है कुछ नहीं
-अख़्तर नाज़मी
Baadal ki tarah jhoom ke laharaake peeyenge/ बादल की तरह झूम के लहरा के पियेंगे
बादल की तरह झूम के लहरा के पियेंगे
साक़ी तेरे मैख़ाने पे हम छा के पियेंगे
उन मदभरी आँखों को भी शर्मा के पियेंगे
पैमाने को पैमाने से टकरा के पियेंगे
बादल भी है, बादा भी है, मीना भी है, तुम भी
इतराने का मौसम है अब इतराके पियेंगे
(बादा = शराब), (मीना = शराब रखने पात्र)
देखेंगे कि आता है किधर से ग़म-ए-दुनिया
साक़ी तुझे हम सामने बिठला के पियेंगे
-नज़ीर बनारसी
Muskura kar mila karo humse/ मुस्कुरा कर मिला करो हमसे
मुस्कुरा कर मिला करो हमसे
कुछ कहा और सुना करो हमसे
बात करने से बात बढ़ती है
रोज़ बातें किया करो हमसे
दुश्मनी से मिलेगा क्या तुमको
दोस्त बनकर रहा करो हमसे
देख लेते है सात पर्दों में
यूँ ना पर्दा किया करो हमसे
-इब्राहिमअश्क़
Kanton se daman uljhaana meri aadat hai/ काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है
काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है
दिल मे पराया दर्द बसाना मेरी आदत है
मेरा गला गर कट जाए तो तुझ पर क्या इल्ज़ाम
हर क़ातिल को गले लगाना मेरी आदत है
जिन को दुनिया ने ठुकराया जिन से हैं सब दूर
ऐसे लोगों को अपनाना मेरी आदत है
सब की बातें सुन लेता हूँ मैं चुपचाप मगर
अपने दिल की करते जाना मेरी आदत है
-पयाम सईदी
Parakhna mat parakhne mein koi apna nahin rahta/ परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता
परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता
बडे लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना
जहां दरिया समन्दर से मिला, दरिया नहीं रहता
तुम्हारा शहर तो बिल्कुल नये अंदाज़ वाला है
हमारे शहर में भी अब कोई हमसा नहीं रहता
मोहब्बत एक ख़ुशबू है, हमेशा साथ चलती है
कोई इन्सान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता
-बशीर बद्र
Phir nazar se pila deejiye/ फिर नज़र से पिला दीजिये
फिर नज़र से पिला दीजिये
होश मेरे उड़ा दीजिये
छोड़िये दुश्मनी की रविश
अब ज़रा मुस्कुरा दीजिये
(रविश = रंग-ढंग)
बात अफ़साना बन जायेगी
इस क़दर मत हवा दीजिये
आइये खुल के मिलिये गले
सब तक़ल्लुफ़ हटा दीजिये
(तक़ल्लुफ़ = संकोच, लिहाज)
कब से मुश्ताक़-ए-दीदार हूँ
अब तो जलवा दिखा दीजिये
(मुश्ताक़-ए-दीदार = दर्शन का अभिलाषी)
-जाम नसीमी
Us ki batein to phool hon jaise/ उसकी बातें तो फूल हों जैसे
उसकी बातें तो फूल हों जैसे
बाकी बातें बबूल हों जैसे
छोटी छोटी सी उसकी वो आँखें
दो चमेली के फूल हों जैसे
उसका हँसकर नज़र झुका लेना
सारी शर्तें क़ुबूल हों जैसे
कितनी दिलकश है उसकी ख़ामोशी
सारी बातें फ़ुज़ूल हों जैसे
-नवाज़ देवबंदी
Ghar se nikale the hausla kar ke/ घर से निकले थे हौसला करके
घर से निकले थे हौसला करके
लौट आए ख़ुदा ख़ुदा करके
दर्द-ए-दिल पाओगे वफ़ा करके
हमने देखा है तजुर्बा करके
ज़िन्दगी तो कभी नहीं आई
मौत आई ज़रा ज़रा करके
लोग सुनते रहे दिमाग़ की बात
हम चले दिल को रहनुमा करके
(रहनुमा = पथ-प्रदर्शक, मार्गदर्शक)
किसने पाया सुकून दुनिया में
ज़िन्दगानी का सामना करके
-राजेश रेड्डी
Tera chehra hai aaeene jaisa/ तेरा चेहरा है आईने जैसा
तेरा चेहरा है आईने जैसा
क्यों न देखूँ है देखने जैसा
तुम कहो तो मैं पूछ लूँ तुमसे
है सवाल एक पूछने जैसा
दोस्त मिल जाएँगे कई लेकिन
न मिलेगा कोई मेरे जैसा
तुम अचानक मिले थे जब पहले
पल नही है वो भूलने जैसा
-पयाम सईदी